पोषण अभियान व इंक्रीमेन्टल लर्निंग एप्रोच (आई.एल.ए) प्रषिक्षण कार्यक्रम-
पोषण अभियान व इंक्रीमेन्टल लर्निंग एप्रोच (आई.एल.ए) प्रषिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत डी.आर.डी. (मास्टर ट्रेनर्स) व्दारा आज बी.आर.जी (पर्यवेक्षकों) को ’’कमजोर नवजात शिशु की पहचान और देखभाल’’ का विस्तृत प्रशिक्षण विवेकानंद सभाकक्ष, कलेक्टोरेट परिसर में दिया गया।
जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास श्री सुभाष जैन ने बताया कि प्रशिक्षण में माड्यूल अंतर्गत क्या लोगों को पहले से पता होता है कि कौन से शिशु जीवित नहीं रहे पायेंगे, चिकित्सक यह कैसे पहचान पाते है किन शिशुओं के जीवित रहने की संभावना ज्यादा है, जन्म होते ही कैसे पहचानेंगे कि शिशु कमजोर है, एल.एम.पी. से परिपक्वता की तिथि कैसे निकालेंगे, कमजोर शिशु को जीवित रखने में किस तरह मदद करें, यह कैसे सुनिश्चित करें कि जन्म के समय कमजोर पैदा हुआ कोई भी शिशु हमसे छूटे न जैसे बिन्दुओं पर प्रशिक्षण दिया गया। इस प्रशिक्षण के उपरान्त क्षेत्रीय पर्यवेक्षक(बी.आर.जी.)के व्दारा अपनी परियोजना में सेक्टर स्तरीय प्रशिक्षण 22 एवं 24 अप्रैल-2019 तक समस्त ऑगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को दिया जायेगा।

इस अवसर पर उपस्थित प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास सुश्री नीलम चौहान ने सम्बोधित करते हुए कहा कि उक्त मॉड्यूल का प्रशिक्षण भारत सरकार से प्राप्त मॉड्यूल के अनुसार दिया गया है। समस्त बी.आर.जी ऑगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को भी गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण अपने-अपने सेक्टर मे ंनिर्धारित दिनांक में देना सुनश्चित करें तथा इसका रिकार्ड, उपस्थिति एवं फोटोग्राफ मूल्यांकन दल के लिए सुरक्षित रखें। आगामी अक्षय तृतीय पर होने वाले विवाहों पर पैनी नजर रखने के लिए सभी मैदानी अधिकारियों को सचेत किया गया तथा आव्हान किया गया कि अपने क्षेत्र में होने वाले सभी विवाह में नाबालिग जोड़ो का बाल विवाह नहीं हो, इस प्रकार के विवाह की सूचना प्राप्त होने पर तुरन्त जांच की जाए तथा सही पाये जाने पर तुरन्त वैधानिक कार्यवाही भी करें ताकि बाल विवाह पर अंकुष लग सके।
उक्त प्रशिक्षण श्री आयुष सिंह, प्रेरक-स्वास्थ्य भारत प्रेरक मिषन, श्रीमती माया मिमरोट, पर्यवेक्षक, आईसीडीएस पौलायकलॉ श्रीमती दीपषिखा निगम, पर्यवेक्षक (आईसीडीएस) शाजापुर के व्दारा दिया गया। प्रशिक्षण में परियोजना अधिकारी, समस्त, समस्त बी.सी, समस्त ब्लाक बी.पी.ए. आदि भी उपस्थित थे।
पोषण अभियान व इंक्रीमेन्टल लर्निंग एप्रोच (आई.एल.ए) प्रषिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत डी.आर.डी. (मास्टर ट्रेनर्स) व्दारा आज बी.आर.जी (पर्यवेक्षकों) को ’’कमजोर नवजात शिशु की पहचान और देखभाल’’ का विस्तृत प्रशिक्षण विवेकानंद सभाकक्ष, कलेक्टोरेट परिसर में दिया गया।
जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास श्री सुभाष जैन ने बताया कि प्रशिक्षण में माड्यूल अंतर्गत क्या लोगों को पहले से पता होता है कि कौन से शिशु जीवित नहीं रहे पायेंगे, चिकित्सक यह कैसे पहचान पाते है किन शिशुओं के जीवित रहने की संभावना ज्यादा है, जन्म होते ही कैसे पहचानेंगे कि शिशु कमजोर है, एल.एम.पी. से परिपक्वता की तिथि कैसे निकालेंगे, कमजोर शिशु को जीवित रखने में किस तरह मदद करें, यह कैसे सुनिश्चित करें कि जन्म के समय कमजोर पैदा हुआ कोई भी शिशु हमसे छूटे न जैसे बिन्दुओं पर प्रशिक्षण दिया गया। इस प्रशिक्षण के उपरान्त क्षेत्रीय पर्यवेक्षक(बी.आर.जी.)के व्दारा अपनी परियोजना में सेक्टर स्तरीय प्रशिक्षण 22 एवं 24 अप्रैल-2019 तक समस्त ऑगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को दिया जायेगा।

इस अवसर पर उपस्थित प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास सुश्री नीलम चौहान ने सम्बोधित करते हुए कहा कि उक्त मॉड्यूल का प्रशिक्षण भारत सरकार से प्राप्त मॉड्यूल के अनुसार दिया गया है। समस्त बी.आर.जी ऑगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को भी गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण अपने-अपने सेक्टर मे ंनिर्धारित दिनांक में देना सुनश्चित करें तथा इसका रिकार्ड, उपस्थिति एवं फोटोग्राफ मूल्यांकन दल के लिए सुरक्षित रखें। आगामी अक्षय तृतीय पर होने वाले विवाहों पर पैनी नजर रखने के लिए सभी मैदानी अधिकारियों को सचेत किया गया तथा आव्हान किया गया कि अपने क्षेत्र में होने वाले सभी विवाह में नाबालिग जोड़ो का बाल विवाह नहीं हो, इस प्रकार के विवाह की सूचना प्राप्त होने पर तुरन्त जांच की जाए तथा सही पाये जाने पर तुरन्त वैधानिक कार्यवाही भी करें ताकि बाल विवाह पर अंकुष लग सके।
उक्त प्रशिक्षण श्री आयुष सिंह, प्रेरक-स्वास्थ्य भारत प्रेरक मिषन, श्रीमती माया मिमरोट, पर्यवेक्षक, आईसीडीएस पौलायकलॉ श्रीमती दीपषिखा निगम, पर्यवेक्षक (आईसीडीएस) शाजापुर के व्दारा दिया गया। प्रशिक्षण में परियोजना अधिकारी, समस्त, समस्त बी.सी, समस्त ब्लाक बी.पी.ए. आदि भी उपस्थित थे।
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